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मंगलवार, 12 जुलाई 2011

सबूत नहीं मिले और छूट गया रणवीर सेना का कमांडर

 नवल किशोर

1994 से लेकर 2002 तक करीब 287 लोगों की हत्या का मुख्य आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया सबूतों के अभाव में बरी हो गया। 9 वर्षों के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सामंतों के प्रति वफादारी के कारण शुक्रवार को जैसे ही ब्रह्मेश्‍वर मुखिया जेल से बाहर निकला, हजारों लोगों ने उसका जयघोष कर स्वागत किया। 70 लग्जरी गाड़ियों और करीब 500 मोटरसाइकिल सवारों के काफिले के साथ जीवित राक्षस का पर्याय बन चुका कुख्यात मुखिया भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा नामक अपने पैतृक गांव पहुंचा। इससे पहले संदेश पहुंचने पर हजारों लोगों ने मुखिया का स्वागत किया। इस मौके पर उपस्थित लोगों ने उसे एक हजार राइफलों की सलामी दी। करीब तीन घंटे तक लोगों ने बिहार पुलिस की उपस्थिति में उसकी शान में फायरिंग की।
ब्रह्मेश्‍वर मुखिया ने सबसे पहले अपने ही गांव खोपिरा में रक्तपात मचाया था। यही वजह रही कि शुक्रवार को उसके खोपिरा पहुंचने पर जहां गांव के सामंतों ने जमकर खुशियां मनायी, वहीं गांव के दूसरे हिस्से में श्मशानी शांति पसरी थी। अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने करीब 15 दिन पहले ही खोपिरा के गरीबों के इलाके में एक अस्थायी पुलिस पिकेट की व्यवस्था कर दी थी। यह इस बात का सबूत है कि मुखिया को राज्य सरकार के इशारे पर ही कोर्ट ने जमानत दी है। यदि ऐसा नहीं होता, तो आनन-फानन में पिछड़ों और दलितों के इलाके में पिकेट नहीं बनाया जाता। खोपिरा के निवासी मंगल मांझी ने बताया कि मुखिया ने पहली बार 29 अप्रैल 1995 को ब्रह्मेश्‍वर मुखिया की मौजूदगी में उसके इशारे पर रणवीर सेना के राक्षसों ने 5 दलितों की हत्या कर दी। मारे गये लोगों मे से एक उसके अपने पिता थे।
लितों, पिछड़ों और गरीबों की राजनीति करने वाले बिहार के किसी भी राजनेता ने इस संबंध में कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। सबसे बड़ा आश्चर्य यह कि गरीबों के नाम पर जान लेने और देने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी ब्रह्मेश्‍वर मुखिया के नाम पर चुप्पी साध ली। हालांकि इस संबंध में भाकपा माले के कार्यालय सचिव संतोष सहर ने बताया कि रविवार को उनके दल के वरिष्ठ नेताओं की बैठक होनी है। इस बैठक में ब्रह्मेश्‍वर मुखिया को राज्य सरकार द्वारा दी गयी आजादी के संबंध में गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
मालूम हो कि ब्रह्मेश्‍वर सिंह वह व्यक्ति है, जिसने 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारा। इसके इशारे पर दलितों और पिछड़ों की बच्चियों के साथ बलात्कार किया गया। सैकड़ों मासूमों की गर्दन एक झटके से उड़ा देने वाले रणवीर सेना का मास्टरमाइंड ब्रह्मेश्वर मुखिया खुलेआम कहता था कि दलितों और पिछड़ों के बच्चों को मारकर उसने और उसके साथियों ने कोई गलती नहीं की। बड़े होने पर वे नक्सली ही बनते। महिलाओं का बलात्कार कर उन्हें जान से मार देने वाले इस दरिंदे का कहना था कि ये महिलाएं नक्सलियों को जन्म देतीं, इसलिए इनका मारा जाना अनिवार्य है।
अदालत ने ब्रह्मेश्‍वर सिंह को 22 में से 16 मामलों में पहले ही बरी कर दिया था और पांच मामलों में इसे जमानत मिल चुकी थी। कल इस दरिंदे को अदालत ने एक और मामले में जमानत दे दी। इस प्रकार ब्रह्मेश्वर मुखिया को जेल से बाहर आने की अनुमति मिल गयी।
यह कानून का मजाक नहीं तो और क्या है? जिसने 300 लोगों की हत्या कर दी, जिसने बाथे नरसंहार जैसी निंदनीय घटनाओं को अंजाम दिया, उस राक्षस के खिलाफ सरकार को कोई सबूत नहीं मिला। कानून के कई जानकार यह बताते हैं कि सरकार ने अपनी ओर से ब्रह्मेश्‍वर मुखिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। वर्ष 2006 से वह बिहार के विभिन्न जेलों में सरकारी मेहमान के रूप में रह रहा था। दलितों और पिछड़ों का खून पीने वाले इस शख्‍स को बिहार सरकार की ओर से वह हर सुविधा हासिल थी, जो एक राजनीतिक कैदी को मिलती है। यानी बिहार सरकार की नजर में वह दलितों और पिछड़ों का कातिल नहीं, बल्कि एक राजनीतिक कार्यकर्ता था।
पने मूल स्वभाव के अनुसार नीतीश कुमार ने अपनी वफादारी साबित करते हुए ब्रह्मेश्वर मुखिया के खिलाफ कोई सबूत न पेशकर अपनी स्वामीभक्ति साबित कर दी। हालांकि यह दूसरा अवसर था, जब नीतीश कुमार ने ब्रह्मेश्वर मुखिया और इनके खूनी सेना यानी रणवीर सेना अर्थार्त भूमिहार सेना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करते हुए जनवरी 2006 में ही अमीरदास आयोग को भंग कर दिया। अमीरदास आयोग का गठन तत्कालीन राजद सरकार ने रणवीर सेना के कारनामों को जगजाहिर करने के लिए किया था। जस्टिस अमीरदास भी मानते हैं कि उनकी ओर से सारी कार्रवाई पूरी हो चुकी थी, केवल रिपोर्ट देना ही शेष रह गया था। लेकिन इससे पहले कि मौत के दरिंदे और इसकी खूनी सेना का काला सच लोगों के सामने आ पाता, नीतीश कुमार ने उस आयोग को ही भंग कर दिया।
रीब 300 दलितों और पिछड़ों की हत्या करने वाले ब्रह्मेश्‍वर मुखिया का कहना है कि नीतीश कुमार बिहार में अच्छा काम कर रहे हैं। 9 सालों के बाद नीतीश कुमार की विशेष कृपा के कारण जेल से बाहर निकले मुखिया का आरा जेल के बाहर हजारों लोगों की भीड़ ने फूल-माला के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर अपने पुराने रंग दिखाते हुए इस खूनी भेड़िये ने मुस्कराते हुए कहा कि नीतीश कुमार बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। सैकड़ों लोगों की निर्मम हत्या का जिम्मेवार ब्रह्मेश्‍वर मुखिया ने कहा कि उसे कानून पर पूरा भरोसा है।
ब्रह्मेश्वर मुखिया और रणवीर सेना का काला इतिहास
बिहार में ब्रह्मेश्‍वर मुखिया ने वर्ष 1994 के अंत रणवीर सेना यानि भूमिहार सेना का गठन किया था। इस सेना के गठन का एकमात्र उद्देश्य था – दलितों और पिछड़ों की आवाज को कुंद करना। इस सेना ने 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा में पहली बार कहर बरपाया। इस दिन ब्रह्मेश्‍वर मुखिया की मौजूदगी में उसके इशारे पर रणवीर सेना ने 5 दलितों की हत्या कर दी। इसके बाद करीब 3 महीने बाद रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के ही उदवंतनगर प्रखंड सरथुआं गांव में 25 जुलाई 1995 को 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना को अंजाम देने के ठीक 10 दिन बाद ही रणवीर सेना ने 5 अगस्त 1995 को भोजपुर के बड़हरा प्रखंड के नूरपुर गांव में हमला कर 6 लोगों की हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद गांव की 4 महिलाओं का अपहरण कर लिया गया और सभी महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार करने के बाद उनका कत्ल कर दिया गया। मारी गयी इन महिलाओं में एक 13 साल की बच्ची भी शामिल थी। पुलिसिया रिकार्ड में यह आज भी दर्ज है कि इस बच्ची का बलात्कार किसी और ने नहीं, बल्कि ब्रह्मेश्वर मुखिया ने ही कि था और अपना मुंह काला करने के बाद इसी दरिंदे ने उसके जननांग में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी।
7 फरवरी 1996 को रणवीर सेना के दरिंदों ने एक बार फिर भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के चांदी गांव में हमला कर 4 लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद 9 मार्च 1996 को भोजपुर के सहार प्रखंड के पतलपुरा में 3, 22 अप्रैल 1996 को सहार प्रखंड के ही नोनउर नामक गांव में रणवीर सेना ने 5 लोगों की हत्या कर दी। सहार में रणवीर सेना का खूनी तांडव रुका नहीं। 5 मई 1996 को नाढी गांव में 3 लोगों की हत्या करने के बाद रणवीर सेना ने 19 मई यानि ठीक 14वें दिन एकबार फिर नाढी गांव पर कहर बरपाया और 3 और लोगों की हत्या कर दी। 25 मई 1996 को रणवीर सेना ने उदवंतनगर के मोरथ नामक गांव में 3 लोगों की हत्या कर दी। यानी 29 अप्रील 1995 से लेकर 25 मई 1996 तक के बीच रणवीर सेना ने कुल 38 लोगों की हत्या कर दी।
इसके बाद 11 जुलाई 1996 के दिन पूरा बिहार कांप उठा था। वजह यह थी कि आज के नीतीश कुमार के भगवान यानि ब्रह्मेश्‍वर मुखिया के नेतृत्व में रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के ही बथानी टोला नामक दलितों और पिछड़ों की बस्ती पर हमला बोलकर 21 लोगों की गर्दन रेतकर हत्या कर दी। इस घटना को अंजाम देने के बाद रणवीर सेना ने 25 नवंबर 1996 को सहार के पुरहारा में 4, 12 दिसंबर 1996 को संदेश प्रखंड के खनेऊ में 5, 24 दिसंबर 1996 को सहार के एकवारी गांव में 6, और 10 जनवरी 1997 को तरारी प्रखंड के बागर नामक गांव में 3 लोगों की हत्या कर दी गयी। इस प्रकार बिहार में मौत का नंगा नाच नाचने वाले रणवीर सेना ने केवल भोजपुर जिले में कुल 77 लोगों की निर्मम हत्या की थी।
वर्ष 1997 में रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के बाहर कदम रखा और 31 जनवरी 1997 को जहानाबाद के मखदूमपुर प्रखंड के माछिल गांव में 4 दलितों की हत्या कर दी। इस घटना को अंजाम देने के बाद रणवीर सेना का हौसला इस कदर बढ़ा कि उसने पटना जिले के बिक्रम प्रखंड के हैबसपुर नामक गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी। इस घटना को रणवीर सेना ने 26 मार्च 1997 को अंजाम दिया। इसके बाद 28 मार्च 1997 को ही जहानाबाद के अरवल प्रखंड (वर्तमान में अरवल जिला बन चुका है) के आकोपुर में 3, भोजपुर के सहार प्रखंड के एकवारी गांव में 10 अप्रैल 1997 को 9 और भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के नगरी गांव में 11 मई 1997 को 10 लोगों की हत्या रणवीर सेना ने कर दी।
2 सितंबर 1997 को रणवीर सेना के दरिंदों ने जहानाबाद के करपी प्रखंड के खडासिन नामक गांव में 8 और 23 नवंबर 1997 को इसी प्रखंड के कटेसर नाला गांव में 6 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गयी। इसके बाद 31 दिसंबर 1997 को ब्रह्मेश्‍वर मुखिया की उपस्थिति में रणवीर सेना ने जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे नामक गांव में एक साथ 59 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। यह बिहार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नरसंहार है। पाठकों को बता दें कि इस नरसंहार के मामले में कुल 18 लोगों को आजीवन उम्रकैद की सजा दी गयी है। जबकि मुख्य अभियुक्त ब्रह्मेश्‍वर मुखिया को इस मामले में बरी कर दिया गया और इसका श्रेय भी रणवीर सेना के दलाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही जाता है।
खैर, 25 जुलाई 1998 को जहानाबाद के करपी प्रखंड के रामपुर गांव में एक बार फिर रणवीर के दरिंदों ने मौत का खेल खेला और तीन लोगों की जान ले ली। 25 जनवरी 1999 को रणवीर सेना ने जहानाबाद में एक और बड़े नरसंहार को अंजाम दिया। जहानाबाद के अरवल प्रखंड के शंकरबिगहा नामक गांव में 23 लोगों की हत्या कर दी गयी। इसके बाद 10 फरवरी 1999 को जहानाबाद के नारायणपुर में 12, 21 अप्रैल 1999 को गया जिले के बेलागंज प्रखंड के सिंदानी नामक गांव में 12, 28 मार्च 2000 को भोजपुर के सोनबरसा में 3, नोखा प्रखंड के पंचपोखरी में 3 और 16 जून 2000 को रणवीर सेना ने औरंगाबाद जिले के गोह प्रखंड के मियांपुर गांव में 33 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी।
यह सच्चाई है उस रणवीर सेना की और उस व्यक्ति की, जिसने रणवीर सेना को जन्म दिया। यह उस व्यक्ति की भी सच्चाई है, जिसे ब्रह्मेश्वर मुखिया के नाम से जाना जाता है और इस दरिंदे को नीतीश सरकार ने न सिर्फ मेहमान बनाकर रखा, बल्कि सारे कानून ताक पर रखते हुए उसे जेल से बाहर निकाला।
मौत के दरिंदों की दरिंदगी का एक नमूना
16जून 2000… स्थान औरंगाबाद जिला के गोह प्रखंड का मियांपुर गांव। इस गांव में अधिकांश लोग यादव जाति के हैं। रात के करीब सवा सात बजे सैंकड़ों की संख्या में आये रणवीर सेना के दरिंदों ने गांव को घेर लिया। करीब पौने आठ बजते-बजते दरिंदों ने गांव से बाहर निकलने के सारे रस्ते बंद कर दिये। इसके बाद रणवीर के से करीब 50 दरिदों ने हर घर में घुसकर कत्लेआम मचाया। जो जहां था, उसे वैसे मार दिया। इनकी हैवानियत का एक नमूना यह कि इस घटना में कुल 33 लोग मारे गये। इसमें 20 महिलाएं, 4 बच्चे और केवल 9 वयस्क पुरुष थे।
सुशील मोदी की उलटी वाणी
ब्रह्मेश्‍वर मुखिया के जेल से बाहर निकलने पर अपनी प्रतिक्रिया में उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि इसके लिए राजद जिम्मेवार है। जबकि हकीकत यह है कि वर्ष 2002 में राजद सरकार ने ही इंसान के नाम पर राक्षक ब्रह्मेश्वर मुखिया को जेल के अंदर डाला था और तब जाकर सूबे में रणवीर सेना का खात्मा हो सका। राजद सरकार ने ही अमीरदास आयोग का गठन किया था, जिसे नीतीश कुमार ने भूमिहारों के प्रति अपनी वफादारी दिखाते हुए सत्ता में आने के ठीक एक महीने के अंदर ही भंग कर दिया।
(नवल किशोर कुमार। बिहार की पत्रकारिता में युवा सजग चेहरा। प्रतिरोध की खबरों के संयोजक। दैनिक आज के पटना संस्‍करण से जुड़े हैं। उनसे editor@apnabihar.org पर संपर्क किया जा सकता है।)